फरवरी के आरंभ में जयपुर जाना हुआ। यात्रा इस मायने में यादगार रही कि वहां किताबों का एक खजाना हाथ लगा। खजाना है दस किताबों का एक सेट। सेट का मूल्य इतना कम है कि विश्वास नहीं होता है कि आज की तारीख में भी यह संभव है। पर इसे संभव बनाया है जयपुर के बोधि प्रकाशन के मायामृग जी ने। मायामृग स्वयं भी कवि हैं।
इस सेट को बोधि पुस्तक पर्व नाम दिया है। पहले सेट में चार कविता संग्रह हैं,तीन कहानी संग्रह और तीन किताबें क्रमश संस्मरण,डायरी और लेखों की हैं। कवि हैं नंद चतुर्वेदी,विजेन्द्र,चंद्रकांत देवताले और हेमंत शेष। सभी नई कविता के जाने-माने और स्थापित हस्ताक्षर हैं। कहानीकार हैं महीपसिंह, प्रमोद कुमार शर्मा और सुरेन्द्र सुन्दरम्। महीपसिंह भी स्थापित कहानीकार हैं। शेष दो कहानीकार राजस्थान के सुपरिचित हस्ताक्षर हैं।


