इसकी भूमिका में मोहतरमा यह कहती पायी जाती हैं कि देश का अर्थ यदि सुरक्षा है, देश का अर्थ यदि आज़ादी है तो निश्चित रूप से औरत का कोई देश नहीं होता । धरती पर कोई औरत आज़ाद नहीं है, धरती पर कहीं कोई औरत सुरक्षित नहीं है । बकौल स्वयँ उनके जो तस्वीर नज़र आती है, वह आधी अधूरी है, इसलिये ( फिलहाल ) उन्होंने अँधेरे को थाम लिया है । |
उनकी सोच सही दिशा में हो सकती थी, यदि वह उन कारणों की पड़ताल को आगे बढ़ातीं, जिसे उन्हें रेखाँकित किया है..